शुक्रवार, 22 मई 2020

श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् (Shiva Panchakshara Stotram)

॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥






पंचाक्षर स्तोत्र संस्कृत का एक स्तोत्र है। इस स्तोत्र के रचयिता श्री आदि शंकराचार्या जी हैं जो महान शिव भक्त, धर्म प्रवर्तक तथा अद्वैतवादी थे।जो कोई व्यक्ति शिव के पंचाक्षर मंत्र का नित्य ध्यान करता है वह शिव के पुण्य लोक को प्राप्त करता है तथा शिव के साथ सुख पूर्वक निवास करता है शिव चतुर्दशी के दिन विधिपूर्वक व्रत रखकर शिव पूजा-स्तोत्रों का पाठ तथा शिवकथा भी पढ़ना लाभदाय‍ी रहता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई स्तुतियों की रचना प्राप्त होती हैं। इन सभी में “श्री शिव पंचाक्षर स्त्रोत” एक महत्वपूर्ण मंत्र है। इसका प्रतिदिन जाप करने से भगवान शंकर शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं तथा महादेव का आशिर्वाद प्राप्त होता है।:

वेदसारशिवस्तोत्रम् / वेदसार शिवस्तवः (Vedasara Shivastotram)

वेदसारशिवस्तवः




पशूनां पतिं पापनाशं परेशं
गजेन्द्रस्य कृतिं वसानं वरेण्यम् ।
जटाजूट मध्येस्फुद्वाङ्गवारिं
महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम् ॥१॥

बिल्वाष्टकम् (Bilvashtakam)

बिल्वाष्टकम्


बिल्व-पत्र भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय हैं बिल्वाष्टकम् की रचना जगत् गुरु शंकराचार्य जी ने की थी यह एक शक्तिशाली मंत्र है यदि कोई भी व्यक्ति  शिवलिंग पर बिल्व-पत्र चढ़ाता है तो भगवान शिव उस की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं शिव पुराण मेन्न वर्णित है की एक बिल्व-पत्र एक हज़ार कमल के फूलों के समान है
बिल्वाष्टकम् का पाठ करते हुए हर एक श्लोक को पढ़ते हुए तीन पत्तों वाले बिल्व-पत्र को शिवलिंग पर इस प्रकार समर्पित करें कि बिल्व-पत्र का ऊपर वाला हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करे:

शुक्रवार, 15 मई 2020

शिव ध्यान मंत्र (Shiv Dhyan Mantra)

शिव ध्यान मंत्र (Shiv Dhyan Mantra)

संस्कृत के मंत्रों और स्तोत्र का पाठ और स्मरण (Speaking and Memorizing of Lord Shiv Mantras and Stotras)

       संस्कृत के मंत्रों और स्तोत्र का पाठ और स्मरण
(Speaking and Memorizing of Lord Shiv Mantras and Stotras)


 भगवान शिव से संबंधित संस्कृत के मंत्रों और स्तोत्र का पाठ और स्मरण तो सभी करना चाहते हैं प्रंतु इन की भाषा पढ़ने और समझने में कठिन होती है इसलिए ज़्यादातर लोग कोशिश ही नहीं करते या अगर कोशिश करते तो हैं तो बीच में ही छोड़ देते है| इस ब्लॉग में इन मंत्रों और स्तोत्र को पढ़ने और याद करने का आसान तरीका समझाया गया है जिस से कोई भी इन को आसानी से पढ़ और याद कर सकेगा| इन मंत्रों और स्तोत्र को जहाँ याद करना ज़रूरी है इनका अर्थ समझना भी उतना ही ज़रूरी है, इसलिए इस ब्लॉग में इन का भाव भी स्पष्‍ट किया गया है| हमें आशा है की आप को भी यह पसंद आएगा और स्तोत्र में कुछ मूलभूत अंतर होता है|

श्री शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम् (Shri Shiv Prath Smarn Stotram)

श्री शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम्
(Shri Shiv Prath Smarn Stotram)

सुबह-सुबह  जो भी व्यक्ति भगवान भोलेनाथ के इस स्तोत्र का जाप करता है उसको सारा दिन सकारात्मक ऊर्जा भगवान से प्राप्त होती है और इस स्तोत्र का नियमित पाठ आप की कई मुश्किलों को हल कर देता है| प्रस्तुत है श्री शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम्:

गुरुवार, 14 मई 2020

केदारनाथ मन्दिर (Baba Kedarnath Tample)

हिमालये तु केदारं ॥

(Baba Kedarnath Tample)

भगवान भोलेनाथ के बारह ज्योतिर्लिंग में बाबा केदारनाथ का .महत्वपूर्ण स्थान है| बाबा केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंग में वशिष्ट तो है ही साथ ही इनका चार धाम और पॅंच केदारों में भी विशेष स्थान है| बाबा केदारनाथ का शिवलिंग स्वयंभू है अर्थात इसे किसी ने स्थापित नहीं किया बल्कि यह स्वयं ही प्रकट हुआ| इस शिवलिंग को कब खोजा गया इस के बारे में तो पता नहीं प्रंतु यह ज़रूर कहा जाता है की यह शिवलिंग करीब 400 साल तक बर्फ में दबा रहा| वर्तमान केदारनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा किया गया| इस मंदिर की खास बात यह है कि इसे पत्थरों को जोड़ कर नहीं बल्कि इंटर लॉक माध्यम द्वारा बनाया गया जिस कारण इस मंदिर का टिके रहना वास्तुकला का एक अदभुद उदाहरण है|

त्रियुगी-नारायण, उत्तराखण्ड (जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था)

                


           त्रियूगी-नारायण मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले के त्रियूगी नारायण गाँव में स्थित है| यहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था इस विवाह में भगवान नारायण ने माँ पार्वती के भाई बन कर और ब्रह्मा जी ने विवाह में पुरोहित बन कर इस विवाह में अपने कर्तव्य का निर्वाह किया था| कहा जाता है कि शिव-पार्वती के विवाह में प्रज्वलित वेदी अभी तक युगों-युगों से प्रज्वलित है| यह स्थान बहुत ही सुंदर, मन को शांति देने वाला और काफ़ी उँचाई पर है|

अभिनंदन (Welcome)

               


"यस्य निश्वसितं वेदा यो वेदेभ्योऽखिलं जगत् ।
निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थमहेश्वरम् ॥"  (
ऋग्वेद)

Yasya Nisvasitaṁ veda yo vedebhyo khilam Jagat |
Nirmame Tam-aham Vande Vidya-tirtha-mahesvaram ||


वेद जिनके विश्वास हैं और जिन्होंने वेदों के द्वारा इस सृष्टि सा सृजन किया, जो योग और मंत्र आदि विद्याओं के तीर्थ हैं ऐसे भगवान महेश्वर (शिव) की मैं वंदना करता हूँ|