शुक्रवार, 22 मई 2020

बिल्वाष्टकम् (Bilvashtakam)

बिल्वाष्टकम्


बिल्व-पत्र भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय हैं बिल्वाष्टकम् की रचना जगत् गुरु शंकराचार्य जी ने की थी यह एक शक्तिशाली मंत्र है यदि कोई भी व्यक्ति  शिवलिंग पर बिल्व-पत्र चढ़ाता है तो भगवान शिव उस की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं शिव पुराण मेन्न वर्णित है की एक बिल्व-पत्र एक हज़ार कमल के फूलों के समान है
बिल्वाष्टकम् का पाठ करते हुए हर एक श्लोक को पढ़ते हुए तीन पत्तों वाले बिल्व-पत्र को शिवलिंग पर इस प्रकार समर्पित करें कि बिल्व-पत्र का ऊपर वाला हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करे:


बिल्वाष्टकम्

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् ।
त्रिजन्म पापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ।। १ ।।

Tridalam Triguna-karam Trinetram Cha Triya-yudham
Trijanm Papa-samharam Eka-bilvam Shivarpanam ।। 1 ।।

तीन दलों वाले (सत्व, रज और तम), सूर्य, चंद्र और अग्नि तीन नेत्रों के स्वरूप और आयुधास्त्र स्वरूप
तीनों जन्मों के पाप कृत्यों का विनाश करने वाले  एक बिल्वपत्र को मैं भगवान शिव की अर्पण करता हूँ

त्रिशाखै बिल्वपत्रश्र्च अच्छिद्रैः कोमलै: शुभै ।
शिवपूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ।। २ ।।

Trishakhae Bilva-patra-sshrvY AchchidraiH KomalaiH Shubhai
Shivpujam Karishhyami Eka-bilvam Shivarpanam
।। 2 ।।

 तीन शाखाओं रूपी, छिद्रों से रहित, सुकोमल, पवित्र, जो अपने आप में पूर्ण हैं,
मैं  भगवान शिव की पूजा मे एक बिल्वपत्र अर्पण करता हूँ

अखण्डबिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे ।
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो एकबिल्वं शिवार्पणम् ।। ३ ।।

Akhanda-bilva-patraiN Pujite Nanndi-keshware
Shudyantia Sarv-paapebhyo Eka Bilvam Shivarpanam
।। 3 ।।

अखंड बिल्व पत्र से नंदिकेश्वर ( भगवान शिव) की पूजा करने पर,
हम सभी पापों से मुक्त होकर शुद्ध हो जाते हैं इस एक बिल्वपत्र को मैं भगवान शिव को अर्पण करता हूँ

शालिग्रामशिलामेकां विप्राणां जातु  अर्पयेत ।
सोमयज्ञ-महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम् ।। ४ ।।

Shaaligram-shilaa-mekaam VipraaNaam Jaatu Arpayet
Somayadnya-MahaapuNyam Eka-bilva Shivaa-rpaNam ।। 4 ।।

मेरे द्वारा किया गया भगवान शिव को यह बिल्वपत्र का समर्पण,कदाचित ब्राह्मणो को शालग्राम की शिला के समान तथा सोमयज्ञ के अनुष्ठान के समान महान पुण्यशाली होअतः में बिल्वपत्र भगवान शिव को समर्पित करता हूँ

दन्तिकोटि सहस्त्राणि वाजपेयशतानि च ।
कोटिकन्या - महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ।। ५ ।।

Dantikoti SahastraNi Vaajpe-yshtani ch
Koti-kanya-Mahadanam Eka-bilvam Shivarpanam
।। 5 ।।

हजारों करोड़ गजदान, सैंकड़ों बाजपेय यज्ञ के अनुष्ठान,
तथा करोड़ों कन्यायों के महादान से भील अधिक फल देने वाले  एक बिल्व पत्र को मैं भगवान शिव को अर्पण करता हूँ

लक्ष्म्याः स्तनत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम् ।
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ।। ६ ।।

LakshmyaH Stnam Utpanam Mahadevasya Cha Priyam
Bilva-vruksham Prayachchhaami Eka-bilva ShivaarpaNam ।। 6 ।।

विष्णु प्रिय भगवती लक्ष्मी के वक्ष स्थल से  उत्पन्न तथा महादेव जी के अत्यंत प्रिय,
 बिल्व वृक्ष को मैं समर्पित करता हूँ ,यह एक बिल्व पत्र को मैं भगवान शिव को अर्पण करता हूँ

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम् ।
अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ।। ७ ।।

DarshanamBilvavvrukshaSya Sparshanam Paapanaashan-am
Aghora-paapa-sanhaaram Eka-bilva shivaarpaNam ।। 7 ।।

इस बिल्व वृक्ष का दर्शन और स्पर्श मात्र से पापों का नाश होता है,
ना कवल साधारण पाप बल्कि महा पापों से भी मुक्त करने वाले इस एक बिल्व पत्र को मैं भगवान शिव की अर्पण करता हूँ

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे ।
अग्रत: शिवरूपाय एकबिल्वं शिवार्पणम् ।। ।।

Moolato Brahma-roopaaya Madhyato Vishnu-roopiNe
AgratahaH Shiva-roopaaya Eka-bilva ShivaarpaNam ।। 8 ।।

बेल पत्र का मूल भाग ब्रह्मा स्वरूप, मध्य भाग विष्णु स्वरूप
और अग्रभाग  शिव स्वरूप है ऐसा एक बिल्व पत्र मैं भगवान शिव को अर्पण करता हूँ

बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं य: पठेतच्छिवसनिद्धधौ ।
सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिवलोकमवाप्नुयात्‌  ।। ।।

Bilvashhtaka-midam punyam yaH patheth-Shiva-sannidhAu.
Sarv-paap Vinir-muktaH  
Shivalokam-ava-apnuyaat।। 9 ।।

जो भगवान शिव के समीप इस पुण्य प्रदान करने वाले बिल्वाष्टक का पाठ करता है,

वह सभी पापों से मुक्त होकर अंत में शिव-लोक को प्राप्त करता है


इति बिल्वाष्टकं सम्पूर्णम्

Iti Bilvashtakam AampoorNam

इस प्रकार बिल्वाष्टक सम्पूर्ण हुआ।


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