शुक्रवार, 15 मई 2020

शिव ध्यान मंत्र (Shiv Dhyan Mantra)

शिव ध्यान मंत्र (Shiv Dhyan Mantra)


ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम।
पद्मासीनं समंतात्स्तुतममरगणैव्र्याघ्रकृत्तिं वसानं
विश्वाद्यं विश्ववंद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम॥

Dhyayen-nityam Mahesham Rajatgiri-nibham Charu-channdra-vtansam
Ratnna-kalpo-jvlaang Parshu-mrig-vra-bhiti-hastam Parsan-nam|
Pdmaa-seenm smantat-stutam-margneyhi-vyagrkritim Vasaanm
Vishvadyam Vishavvdyam Nikhil-bhay-harm Panch-vaktram Tri-netram||

भावार्थः - चांदी के पर्वत समान, जो सुन्दर चन्द्रमा को आभूषण रूप से धारण करते हैं, रत्नमय अलंकारों से जिनका शरीर उज्ज्वल है , जिनके हाथों में परशु , मृग , वर और अभय मुद्रा है , मुखमण्डल पर आनंद प्रकट होता है , पद्म के आसन पर विराजमान हैं , देवतागण जिनके चारों ओर खड़े होकर स्तुति करते हैं , जो बाघ की खाल पहनते हैं , जो विश्व के आदि , जगत के मूल, और समस्त भयों को हरने वाले हैं , जिनके पांच मुख और तीन नेत्र हैं , उन महेश्वर का नित्य ध्यान करता हूँ।

।। ॐ नमः शिवाय ।।

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