शुक्रवार, 15 मई 2020

श्री शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम् (Shri Shiv Prath Smarn Stotram)

श्री शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम्
(Shri Shiv Prath Smarn Stotram)

सुबह-सुबह  जो भी व्यक्ति भगवान भोलेनाथ के इस स्तोत्र का जाप करता है उसको सारा दिन सकारात्मक ऊर्जा भगवान से प्राप्त होती है और इस स्तोत्र का नियमित पाठ आप की कई मुश्किलों को हल कर देता है| प्रस्तुत है श्री शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम्:




 अथ शिवप्रातःस्मरणस्तोत्रम् ।

प्रात: स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं

Praatah Smaraami Bhava-Bhiiti-Haram Suresham
मैं प्रात: काल में भगवान शिव का ध्यान करता हूँ जो जन्म-मृत्यु को डोर करने वाले हैं और जो देवों के देव हैं,

गंगाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम्।

Ganga-Dharam Vrushabha-Vaahanam-Ambikesham ।
जिन्होने गंगा को अपने शीश पर धारण किया है, जिनकी सवारी बैल है और जो माँ अंबिका के स्वामी हैं,

खट्वांगशूलवरदाभयहसतमीशं

Khattvaanga-Shoola-Varada-Bhaya-Hasta-Meesham
  जिनके दोनों हाथों में गदा और भाला है,

संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।1।।

Samsaara-Roga-Hara-Maushadha-Mdwiyteeyam ॥
  जिनके दोनों हाथों से वह इस संसार के दुखों को दूर करने की शक्ति है,


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प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्द्धदेहं

Praatar-Namaami Girisham Girija-Ardha-Deham
मैं प्रात: झुक कर भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ जिनका आधा शरीर माँ गिरिजा द्वारा बना है,

सर्गस्थितिप्रलयकारनमादिदेवम्।

Sarga-Sthiti-Pralaya-Kaarannam-Aadi-Devam |
जो इस संसार का पोषक और विनाशक भी है,

विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोSभिरामं

Vishva-Iishvaram Vijita-Vishva-Manobhiraamam
जो विश्‍व के ईश्वर हैं और संसारिक हृदयों को जीतने वाले हैं,
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।2।।


Samsaara-Roga-Haram-Aussadham-Advitiiyam ||2||
जो संसार के रोगों को दूर करने की शक्ति रखते हैं,
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प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं

Praatar-Bhajaami Shivam-Ekam-Anant-Madyam
मैं प्रात: शिव को भजता हूँ जो की अनंत हैं,

वेदान्तवेद्यमनघं पुरुषं महान्तम्।

Vedaanta-Vedyam-Anagham Purussam Mahaantam |
वेदान्त बताता है कि भगवान शिव महान हैं,

नामादिभेदरहितं   च   विकारशून्यं
Naama-Aadi-Bheda-Rahitam Ch Vikaar-Shunyam
जो नाम आदि भेद और सब प्रकार के विकारों से शून्य हैं|

( कुछ जगह इस पंक्ति में बदलाव मिलता है इसलिए हम यहाँ उस पंक्ति की भी व्याख्या दे रहे हैं:
नामादिभेदरहितं षड्भावशून्यं

Naama-Aadi-Bheda-Rahitam Ch Shad-Bhaav-Shunyam
जो संसार के रोगों को दूर करने की शक्ति रखते हैं, )


संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।3।।

Samsaara-Roga-Haram-Aussadham-Advitiiyam ||3||
जो संसार के रोगों को दूर करने की शक्ति रखते हैं,
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फलश्रुतिः                                                                     
प्रात: समुत्थाय शिवं विचिन्त्य

Prath Samuthaa-ye Shivam Vichin-ty
जो व्यक्ति प्रतिदिन  प्रात: काल जागकर भगवान शिव का ध्यान कर

श्लोकत्रयं येSनुदिनं पठन्ति

Shalok-tryam Ye-e-nudinm Pthanti
इन तीनों श्लोकों का पाठ करते हैं

ते दु:खजातं बहुजनमसण्जितं

Te Dukh-jatam Bahu-janam-Sanjitam
वे अनेक जन्मों से संचित दुखों से मुक्त होकर

हित्वा पदं यान्ति पदेव शम्भो:।।4।।
Hitva Padam Yanti Padev Shambho||4||
शिवजी के उसी कल्याणमय पद को पाते हैं

॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यकृतं श्रीशिवप्रातःस्मरणस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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